16. त्रिभुज व त्रिभुज के गुणधर्म एवं सर्वांगसमता
उपघटक - 3.4
त्रिभुज व त्रिभुज के गुणधर्म एवं सर्वांगसमता
त्रिभुज : तीन अरेखीय बिंदुओं को रेखाखंडों द्वारा मिलाने पर बनने वाली बंद आकृति को 'त्रिभुज कहत हैं। त्रिभुज के शिर्षबिंदुओं, भुजाओं और कोणों को त्रिभुज के घटक कहते हैं।
त्रिभुज की भुजाएँ : रेख AB, रेख BC, रेख AC
त्रिभुज के कोण : ∠A, ∠B, ∠C
त्रिभुज के शीर्षबिंदु : A, B, C,
त्रिभुज का अंत:भाग व बाहयभाग
प्रतल में खींची गयी आकृति द्वारा प्रतल के तीन भाग होते हैं।
1) त्रिभुज का बाह्यभाग
2) त्रिभुज का अंत:भाग
3) प्रत्यक्ष त्रिभुज
बाह्यभाग के बिंदु - बिंदु S, T, U
अत:भाग के बिंदु - बिंदु P, Q, R
प्रत्यक्ष त्रिभुज पर के बिंदु - बिंदु A, B, C, D, E
त्रिभुज का क्षेत्र : त्रिभुज के अंत:भाग एवं प्रत्यक्ष त्रिभुज से त्रिभुज का क्षेत्र बनता है।
त्रिभुज का बाह्यकोण (बहिष्कोण):
परिभाषा : त्रिभुज के कोण से रैखिक युगल जोड़ी बनाने वाले कोण को उस त्रिभुज का बहिष्कोण कहते हैं।
आकृति में ∠PRS यह Δ PQR का बहिष्कोण है।
प्रत्येक शीर्षबिंदु के पास 2 इस प्रकार त्रिभुज के कुल 6 बहिष्कोण होते हैं।
त्रिभुज के प्रकार : त्रिभुज के कुल 6 प्रकार हैं।
त्रिभुज के प्रकार
| कोण व भुजा द्वारा | |||||
| समद्विबाहु न्यूनकोण त्रिभुज | समद्विबाहु समकोण त्रिभुज | समद्विबाहु अधिककोण त्रिभुज | विषमबाहु न्यूनकोण त्रिभुज | विषमबाहु समकोण त्रिभुज | विषमबाहु अधिककोण त्रिभुज |
त्रिभुज के गुणधर्म :
त्रिभुज के तीन कोणों के गुणधर्म : किसी भी त्रिभुज के तीनों कोणों के मापों का योगफल 180° होता है।
त्रिभुज के बहिष्कोण का गुणधर्म : त्रिभुज के किसी भी बहिष्कोण का माप उसके दूरस्थ अंतःकोणों के मापों के योगफल बराबर होता है।
m∠PRS = m∠QPR + m∠PQR
शीर्षलंब :
त्रिभुज के शीर्षबिंदु से सम्मुख भुजा पर खींची गयी लंब रेखाखंड को त्रिभुज का शीर्षलंब कहते हैं।
आकृति में DM यह शीर्षलंब है। त्रिभुज के तीन शीर्षलंब होते हैं। त्रिभुज के तीनों शीर्षलंब संगामी होते हैं।
त्रिभुज की भुजाओं के लंबसमद्विभाजक :
त्रिभुज की भुजाओं के मध्यबिंदु से जानेवाली लंबरेखा को उस भुजा का लंबसमद्विभाजक कहते हैं।
त्रिभुज के तीन लंबसमद्विभाजक होते हैं। त्रिभुज की तीनों भुजाओं के लंबसमद्विभाजक संगामी होते हैं।
आकृति में रेखा L यह रेख BC की लंबसमद्विभाजक है।
त्रिभुज की माध्यिका :
त्रिभुज के शीर्षबिंदु एव उसके सम्मुख भुजा के मध्यबिंदु को जोडनेवाले रेखाखंड को त्रिभुज की माध्यिका कहते हैं।
त्रिभुज की तीन माध्यिका होती हैं। त्रिभुज की तीनों माध्यिकायें संगामी होती हैं।
आकृति में रेख AP यह त्रिभुज की माध्यिका है। G अंत:केंद्र है। त्रिभुज का अंत:केंद्र प्रत्येक माध्यिका को 2 : 1 अनुपात में विभाजित करता है।
कोणसमद्विभाजक :
त्रिभुज के तीनों कोणसमद्विभाजक संगामी होते हैं।
- त्रिभुज के शीर्षलंब का स्थान :
1) न्यूनकोण त्रिभुज – त्रिभुज के अंत:भाग में।
2) समकोण त्रिभुज – समकोण का शीर्षबिंदु।
3) अधिककोण त्रिभुज – त्रिभुज का बायभाग
• त्रिभुज के शीर्षलंब की सर्वांगसमता :
1) समबाहु त्रिभुज – तीनों शीर्षलंब सर्वांगसम
2) समद्विबाहु त्रिभुज – सर्वांगसम भुजाओं पर स्थित शीर्षलंब सर्वांगसम
3) विषमबाहु त्रिभुज – तीनों शीर्षलंब भिन्न लंबाई के
• त्रिभुज का परिवृत्त :
त्रिभुज का परिवृत्त खींचने के लिए त्रिभुज की भुजाओं का लंबसमद्विभाजक खींचना पड़ता है।
1) न्यूनकोण त्रिभुज का परिकेंद्र – त्रिभुज के अंत:भाग में होता है।
2) समकोण त्रिभुज का परिकेंद्र – कर्ण के मध्यबिंदु में होता है।
3) अधिककोण त्रिभुज का परिकेंद्र – त्रिभुज के बाह्यभाग में होता है।
• त्रिभुज का अंत:वृत्त :
त्रिभुज का अंत:वृत्त खींचने के लिए त्रिभुज के कोणों का कोणसमद्विभाजक खींचना पड़ता है। इस वृत्त का केंद्रबिंदु हमेशा त्रिभुज के अंत:भाग में ही आता है।
• त्रिभुज के भुजासंबंधी गुणधर्म :
त्रिभुज की किसी भी दो भुजाओं की लंबाई का योगफल उसकी तीसरी भुजा की लंबाई से अधिक होती है। त्रिभुज की बड़ी भुजा के सामनेवाला कोण बड़ा होता है। और छोटी भुजा के सामनेवाला कोण छोटा होता है।
• त्रिभुज की रचना :
त्रिभुज के तीन भुजा एवं तीन कोण दिए गए हों तो त्रिभुज की रचना कर सकते हैं। परंतु कुछ विशिष्ट घटक दिए जाएँ तो भी अपेक्षित त्रिभुज बनाना संभव है।
1) तीनों भुजाओं की लंबाई दी गयी हो तो त्रिभुज की रचना करना।
2) दो भुजाओं की लंबाई और उनमें समाविष्ट कोण का माप दिया गया हो तो त्रिभुज की रचना करना।
3) दो कोणों के माप और उनमें समाविष्ट भुजा की लंबाई दी गयी हो तो त्रिभुज की रचना करना।
4) कर्ण व एक भुजा की लंबाई दी गयी हो तो समकोण त्रिभुज की रचना करना।
• त्रिभुज के शीर्षबिंदुओं की एकैकी संगति :
त्रिभुज के शीर्षबिंदुओं में कुल छह प्रकार की एकैकी संगति पायी जाती है।
ABC ↔ PQR
ABC ↔ QPR
ABC↔ RPQ
ABC ↔ PRQ
ABC ↔ QRP
ABC ↔ RQP
प्रत्येक एकैकी संगति द्वारा संगत भुजा व संगत कोणों की जोड़ियाँ लिखी जा सकती हैं।
ABC↔ PQR
• संगत भुजा
(1) भुजा AB ↔ भुजा PQ
2) भुजा BC ↔ भुजा QR
3) भुजा AC ↔ भुजा PR
• संगत कोण
1) ∠A↔∠P
1) ∠B ↔∠Q
1) ∠B ↔∠Q
◊ त्रिभुज : संगति, सर्वांगसमता ◊
• सर्वांगसम त्रिभुज :
दो त्रिभुज, उनके शीर्षबिंदुओं की विशिष्ट एकैकी संगति से सर्वांगसम होते हैं। यदि वह दोनों त्रिभुज एक-दूसरे पूर्णतः ढंकलेते हों, तो उन त्रिभुजों को सर्वांगसम त्रिभुज कहते हैं।
संलग्न त्रिभुजो में A↔ P, B↔ Q, C↔ R,
इस संगति के अनुसार ΔABC ≅ ΔPQR
किसी भी दो त्रिभुज के शीर्षबिंदुओं में किसी संगति के अनुसार सर्वांगसम होने के लिए उनकी तीन संगत भुजाओं व तीन संगत कोणों का सर्वांगसम होना आवश्यक होता है। परंतु यदि छह में से तीन विशिष्ट घटक सर्वांगसम हो, तो भी वे दो त्रिभुज सर्वांगसम होते हैं।
• विषमबाहु त्रिभुजों की सर्वांगसमता :
दो विषमबाहु त्रिभुज सर्वांगसम हों, तो शीर्षबिंदुओं की एक ही संगति के अनुसार वे सर्वांगसम होते हैं। उदा. ABC ↔ PQR
इस संगति
ΔABC ≅ ΔPQR
• समद्विबाहु त्रिभुजों की सर्वांगसमता :
दो समद्विबाहु त्रिभुज उनकी शीर्षबिंदुओं की एकैकी संगति से सर्वांगसम होते हों तो वे एक और एकैकी संगति सर्वांगसम होते हैं।
उदा. त्रिभुज ABC ↔ PQR और ABC ↔ PRQ सर्वांगसम है।
• समबाहु त्रिभुजों की सर्वांगसमता :
दो समबाहु त्रिभुज उनके शिर्षाबिंदुओं की एकैकी संगति से सर्वांगसम होगे तो वे सभी एकैकी संगति से सर्वांगसम होते हैं।
ΔABC व ΔPQR यह ABC ↔ PQR इस संगति से सर्वांगसम हैं, तो बची हुई संगतियों से भी सर्वांगसम होंगे।
त्रिभुज की सर्वांगसमता की कसौटियाँ :
1) भुकोभु
2) भुभुभु
3) कोभुको
4) भुकोको
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