18. पायथागोरस का सिद्धांत
उपघटक - 3.5
पायथागोरस का सिद्धांत
इसे जानें
1) ΔABC में, ∠B = 90°
समकोण की संलग्न भुजाओं को समकोण बनानेवाली भुजाएँ और समकोण के सामने वाली भुजा AC को कर्ण कहते हैं।
2) समकोण त्रिभुज में
(क र्ण) = (एक भुजा)² + (दूसरी भुजा)²
अथवा
(क र्ण) = (आधार)² + (ऊँचाई)²
समकोण ΔABC में
(AC)² = (BC)² + (AB)²
3) जब तीन धन संख्याओं के समूह में सबसे बड़ी संख्या का वर्ग अन्य दो संख्याओं के वर्गों के योगफल के बराबर होता है तब उन तीन संख्याओं के समूह को पायथागोरस का त्रिक कहते हैं।
उदा. (6, 8, 10), (3, 4, 5), (5, 12, 13),...
4) वर्ग का विकर्ण = √2 x भुजा
5) वर्ग का क्षेत्रफल = (भुजा)² = ½ × (विकर्ण)²
6) 30°, 60°, 90°, त्रिभुज का प्रमेय :
30° माप वाले कोण के सामनेवाली भुजा कर्ण की आधी
एवं 60° वाले कोण के सामनेवाली भुजा कर्ण के √3⁄2 गुना होती है।
7) 45°, 45°, 90°, त्रिभुज का प्रमेय :
यदि ∠A = ∠C = 45° ∠ B = 90° हो
और AB = BC = x हो तो
AC = √2x होता है।
समद्विबाहु समकोण त्रिभुज में कर्ण की लंबाई सर्वांगसम भुजा की √2 गुना होता है।
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