2. परिमेय संख्याएँ और उनपर की जानेवाली संक्रियाएँ
1.2 : परिमेय संख्याएँ और उनपर की जानेवाली संक्रियाएँ
| इसे जाने ।
♦ प्राकृत संख्याओं का समूह : 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, ......
♦ पूर्ण संख्याओं का समूह : 0, 1, 2, 3, 4, 5, 6......
♦ पूर्णांक संख्याओं का समूह : -5, -4, -3,-2,-1, 0, 1, 2, 3, 4, 5......
♦ 0 ⁄ शून्येत्तर पूर्णांक संख्या =0
♦ कोई भी पूर्णांक संख्या ⁄ 0 = यह भागफल निश्चित नहीं किया जा सकता।
♦ दो पूर्णांक संख्याओं के भागफल से एक परिमेय संख्या बनती है। परंतु हर शून्येत्तर पूर्णांक होना चाहिए।
♦ सभी पूर्णांक संख्याएँ परिमेय संख्याओं के समूह में समाहित होती हैं।
♦ परिमेय संख्याओं का हर धनात्मक पूर्णांक के रूप में लिखते हैं।
♦ जिन दो परिमेय संख्याओं का योगफल 0 होता है उन संख्याओं को योगात्मक प्रतिलोम या विपरीत संख्या' कहते हैं।
♦ जिन दो परिमेय संख्याओं का गुणनफल 1 होता है तब वे संख्याएँ एक-दूसरे की गुणात्मक प्रतिलोम होती हैं।
♦ किसी परिमेय संख्या को शून्येत्तर परिमेय संख्या से भाग देने पर भागफल परिमेय संख्या प्राप्त होती है।
♦ किसी भी शून्येत्तर परिमेय संख्या को उसी संख्या से भाग देने पर भागफल 1 आता है।
♦ सबसे बड़ी परिमेय संख्या बताई नही जा सकती है।
♦ सबसे छोटी परिमेय संख्या बताई नहीं जा सकतीहै।
♦ संख्यारेखा पर कोई भी परिमेय संख्या बाई तरफ की संख्या से बड़ी और दाईं तरफ की संख्या से छोटी होती है।
♦ सभी ऋणात्मक परिमेय संख्याएँ 0 के बाई तरफ होती हैं इसलिए वह 0 से छोटी होती हैं।
♦ दो धनात्मक परिमेय संख्याओं का हर समान होता है तो उन परिमेय संख्याओं में बड़े अंश की संख्या बड़ी होती है।
7 ⁄ 12 >5 ⁄ 12 >1 ⁄ 12,
♦ परिमेय संख्याओं के हर भिन्न होने पर उनके हरों को समान करके छोटा/बड़ा तय किया जाता है।
♦ किसी परिमेय संख्या में 0 को जोड़ने तथा घटाने पर वही परिमेय संख्या आती है।
♦ किसी दो परिमेय संख्याओं का योगफल, अंतर, गुणनफल एवं भागफल परिमेय संख्या होता है।
♦ दो परिमेय संख्याओं के बीच असंख्य परिमेय संख्याएँ होती हैं।
♦ ऋणात्मक परिमेय संख्याओं के हर समान होने पर निम्नलिखित प्रकार से असमानता दर्शायी जाती है।
e.g. -3 ⁄ 4 > -5 ⁄ 4 >-7 ⁄ 4
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