25. साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज

 उपघटक - 6.2

: साधारण ब्याज और चक्रवृद्धि ब्याज

इसे जानें

मूलधन : बैंक, पतपेढ़ी से लिया गया या उसमें जमा की गयी राशि को मूलधन कहते हैं।

अवधि : मूलधन का उपयोग जितने समय के लिए किया जाता है उसे अवधि कहते हैं।

दर : 100 रुपये के लिए 1 वर्ष बाद दी जाने वाली अतिरिक्त राशि को ब्याज की दर कहते हैं। इसे प्रतिशत प्रतिवर्ष के रुप में व्यक्त करते हैं।

      ♦ जब ब्याज की गणना 1 वर्ष के लिए किया जाता है तथा ब्याज की राशि मूलधन में न मिलाते हुए निकाला जाता है एस प्रकार के ब्याज को साधारण ब्याज कहते हैं ।

      ♦ इसी प्रकार जब वर्षभर के ब्याज की राशि को मूलधन में मिलाते हैं तथा अगले वर्ष इस बढ़ी हुयी राशि पर भी ब्याज निकाला जाता है तो इस पद्धति से निकाले गये ब्याज को चक्रवृद्धि ब्याज कहते हैं।

महत्त्वपूर्ण सूत्र :

मिश्रधन = मूलधन + ब्याज

मूलधन = मिश्रधन –  ब्याज

 ब्याज = मिश्रधन- मूलधन

A- राशि (मिश्रधन)

P- मूलधन

R- ब्याज की दर

N - समय (अवधि)

साधारण ब्याज = (मूलधन x दर x समय) ⁄ 100

= (मxदxस) ⁄ 100

= P×N×R ⁄ 100

चक्रवृद्धि द्वारा मिश्रधन A = P (1+ R⁄ 100 )N 

∴ चक्रवृद्धि ब्याज = मिश्रधन – मूलधन

=A-P

उपयोजन : जनसंख्या में होने वाली वृद्धि, यंत्रों की, वाहनों का होनेवाला क्षरण तथा इसके कारण उसकी कीमत में होने वाली कमी को चक्रवृद्धि ब्याज के सूत्र का प्रयोग करके निकाला जाता है। सूत्र में वृद्धि के समय R का मान धनात्मक (+Ve) तथा कमी के समय R का मान ऋणात्मक (-Ve) लेते हैं।

वृद्धि हो तो A = P(1+ R⁄ 100)N

अवपात/क्षरण/कमी हो तो R ऋण A = P (1+ -R⁄ 100)N

• किसी मूलधन की दो राशियाँ ऐसी दी गयी हैं जिनके ब्याज की दर समान है, परंतु अवधि भिन्न है। राशियों में यह अंतर समय अवधि के अंतर के ब्याज के बराबर होता है।

• समान अवधि के लिए मिलने वाले ब्याज का अनुपात उनके मूलधन व दर के गुणनफल के अनुपात के बराबर होता है।

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