31. बहुपद
उपघटक -7.4
बहुपद
इसे जानें
♦ बहुपद :
बैजिक व्यंजक में प्रत्येक चर का घातांक पूर्ण संख्या हो तो उस व्यंजक को बहुपद कहते हैं।
♦ बहुपद की कोटि (घात) -
दिए गए बहुपद में चर का सबसे बड़ा घातांक बहुपद की कोटि कहलाता है। स्थिर बहुपद की कोटि शून्य होती है। शून्य बहुपद की कोटि की व्याख्या नही की जा सकती है। एक से अधिक चर में बहुपद की कोटि निश्चित करने के लिए उस बहुपद के प्रत्येक पद में आए चर के घातों का योग करने पर जो योगफल सर्वाधिक होता है उसे उस बहुपद की कोटि कहते हैं। जब बहुपद के पद चर के घात के बढ़ते या घटते क्रम में लिखे हों तो इस प्रकार से लिखे बहुपद को प्रामाणिक रुप (सामान्य रूप) कहते हैं।
♦ बहुपदों का जोड़, घटाना और गुणा बैजिक व्यंजक के गुणनफल के रूप में करते हैं।
♦ बहपदों के भाग में भी भाज्य = भाजक x भागफल + शेष का संबंध होता है। भाग में शेष की कोटि, भाजक की कोटि से छोटी होती है।
♦ बहुपदों का गुणनखंड करने के लिए सूत्रों का उपयोग होता है।
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