३२. छंद (दोहा, चौपाई) 

 

उपघटक - छंद (दोहा, चौपाई) 

छंद के दो प्रकार है- 1) दोहा 2) चौपाई

दोहा : दोहा में चार चरण होते हैं। यह दो पंक्तियों में लिखा जाता है। इसके पहले और तीसरे चरण में तेरह तेरह मात्राएँ होती है। दूसरे और चौथे चरण में ग्यारह-ग्यारह मात्राएँ होती हैं। -हस्व स्वर की एक मात्रा और दीर्घ स्वर तो मात्रा गिनी जाती है। हस्व मात्रा का चिहन ( | ) और दीर्घ मात्रा का चिह्न ( ऽ ) होता है।

उदाहरण :

कथनी     मीठी     खांड    सी।

।।ऽ           ऽऽ         । ऽ      ऽ    = 13 मात्राएँ

करनी   विष   की    लोय।

॥ऽ          ॥     ऽ      ऽ|           = 11 मात्राएँ

कथनी तजि करनी करै ।

|| ऽ     ||      || ऽ   | ऽ         = 13 मात्राएँ

विष  तें    अमृत  होय।

॥     ऽ    । । ।      ऽ|             = 11 मात्राएँ

चौपाई : चौपाई की रचना मात्राओं के आधार पर की जाती है। चौपाई में चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में 16 मात्राएँ होती हैं। प्रत्येक चरण के अंत में एक या दो गुरु (दीर्घ) मात्राएँ होती ही हैं।

चौपाई के आधे हिस्से को (2 पंक्तियों को) अर्धाली कहते हैं। उदाहरण :

हृदय    सिंधु   मति  सीप   समाना।

। । ।    । ।     ||      ऽ |     | ऽ ऽ       = 16 मात्राएँ

स्वाती    सारद   क   हहि   बखाना

। ऽऽ    ऽ ||      |      ||        ।ऽऽ   = 16 मात्राएँ

जौ   बरखै  बर बारि  बिचारु|

ऽ      || ऽ   ||  ऽ|     | ऽ ऽ    = 16 मात्राए

होही  कवित मुक्तामनि चारु|

ऽ|     |||      ऽ ऽ ||      ऽ ऽ     = 16 मात्राए

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