10. घातांक
| उपघटक - 2.5 : घातांक |
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⇒ 3 x 3 x 3 x 3 x 3 यहाँ 3 को गुणन के रुप में 5 बार लिखा है। इस गुणफल को 35 इस स्वरुप मे लिखते हैं। यहाँ 35 का वाचन ‘तीन का घातांक पाँच', या '3 का 5 वाँ घात' इस प्रकार करते हैं।
⇒ 35 इस घांताक रूप मे 3 'आधार' तथा 5 ‘घातांक' है।
⇒ 2³ का वाचन ‘दो का घन' तथा 'दो का तीसरा घात' करते हैं।
⇒ तीसरा घात' के बदले 'घन' और 'दूसरा घात' के बदले ‘वर्ग' पढ़ते हैं।
⇒ 3¹ = 3 में घातांक 1 हो तो उसके घात को न लिखने का प्रचलन (संकेत) है। (यदि केवल संख्या दी गई हो तो संक्रिया करते समय 1 घातांक लिखा जाता है।)
⇒ दी गई संख्या का, दिए गए आधार से, घातांक रूप में लेखन :
जैसे : आधार 3 लेकर 81 संख्या का घातांक स्वरूप लिखो।
हल : 81 संख्या को 3 के गुणनखंड के स्वरुप में लिखें।
81= 3 x 3 x 3 x 3 = 34
⇒ घातांकवाली संख्याओं का मान ज्ञात करना।
उदा. [-½]6 या [ 16 ⁄ (-2)6 ] = 1 ⁄ 64
या
[-½]6 = (- ½) ×(- ½) ×(- ½) ×(- ½) ×(- ½) ×(- ½) = 1 ⁄ 64
⊗ घातांक के नियम :
1) am × an = a m +n
2) am ÷ an = am-n
3) am ÷ an = 1 ⁄ an-m
4) (am)n = am × n
5) (a × b)m = am × am
6) (a ⁄ b)m = am ⁄ b m
7) a° = 1
8) a-m = 1 ⁄ am
⇒ 10 के घात का उपयोग करके संख्याओं का लेखन :
जैसे 1) हवा में प्रकाश का वेग = 30,00,00,000 मी/सेकंड
= 3 x 10,00,00,000
= 3 x 108 मी/सेकंड
उदा. 2) पृथ्वी का पृष्ठफल = 51,00,00,000 वर्ग किमी.
= 5.1 x 108 वर्ग किमी.
⇒ पृथ्वी का घनफल = 11,00,00,00,00,000 घन किमी. = 1.1 x 1012 घन किमी.
⇒ सूर्य और पृथ्वी के बीच की दूरी = 15,00,00,000 किमी. = 1.5 x 108 किमी.
⇒ पृथ्वी और चंद्रमा के बीच की दूरी = 38,40,00,000 मी. = 3.84 x 108 मी.
⇒ सोने के परमाणु का व्यास = 0.000000000003 सेमी. = 3 x 10-12 सेमी.
⇒ऑक्सीजन के परमाणु का व्यास = 0.0000000000000356 मिमी. = 3.56 x 10-14 मिमी.
⇒ 'a' संख्या का n' वाँ मूल 'a' के 1 ⁄ nघातांक रूप में दर्शाते हैं।
जैसे 811 ⁄ 4 अर्थात 81 का चौथा मूल
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