11. अनुपात-समानुपात तथा विचरण

 

|उपघटक - 2.6 : अनुपात-समानुपात तथा विचरण |

(समय, दूरी, चाल)

- इसे जानें

विशेष टिप्पणी :

♦ यदि दो राशियों की तुलना भाग या भिन्न के रूप में किया जाता है तो उन संख्याओं के भिन्न रूप को अनुपात कहते है।

♦ अनुपात दिखाने के लिए ':' संकेत का प्रयोग करते हैं। जैसे 4 का 7 से अनुपात 4⁄7 = '4 : 7 '

♦ किसी भी अनुपात को अतिसंक्षिप्त स्वरूप में लिखा जाता है।

♦ एक ही प्रकार की दो राशियों का अनुपात ज्ञात करते समय उनकी इकाइयाँ समान करनी पडती हैं। अनुपात की कोई इकाई नहीं होती।

जैसे 15 सेकंड और 1 मिनिट राशियों का अनुपात ज्ञात करो।

हल : पहली राशि = 15 सेकंड और दूसरी राशि = 1 मिनिट = 1 x 60 सेकंड = 60 सेकंड

∴ अनुपात = 15 सेकंड ⁄ 60सेकंड

♦ यदि दो अनुपात समान हों, तब अनुपात की संख्याएँ समानुपात में होती हैं। जैसे 4, 8, 10, 20 समूह की संख्याएँ समानुपात में है या नहीं यह निश्चित कीजिए।

  हल : 4 और 8 का अनुपात = 4⁄8 =½ = 1:2

10 और 20 का अनुपात = 10⁄20 =½ = 1:2

4 : 8 = 10 : 20       ∴  4, 8, 10, 20 समानुपात में हैं।

♦ यदि किसी राशि का मान बदलता है तो उससे संबंधित दूसरी राशियों का मान भी बदलता है। इसको विचरण कहते हैं।

जैसे : रमेश प्रतिदिन दो कथाएँ पढ़ता है।

दिनों की संख्या बढ़ेगी तो कथाओं की संख्या भी बढ़ेगी।

♦ यदि एक राशि बढ़ती है तो दूसरी राशि भी बढ़ती है, यदि एक राशि कम होती है तो दूसरी राशि भी कम होती है और दोनों राशियों का अनुपात स्थिर (अचर) रहता है। इस विचरण को प्रत्यक्ष विचरण या समानुपात कहते हैं।

जैसे 10 पेनों का मूल्य 50 रुपये है। तब 20 पेनों का मूल्य 100 रुपये होगा (बढ़ेगा)।यदि पेनों की संख्या कम कर दी जाए तो कीमत कम होगी। 3 पेनों का मूल्य 15 रुपये होता है।

♦ यदि एक राशि बढ़ती है तथा दूसरी राशि कम होती है या एक राशि कम होती है तब दूसरी राशि बढ़ती है और दोनों राशियों का गुणनफल स्थिर रहता है। इस विचरण को व्युत्क्रम विचरण तथा व्युत्क्रमानुपात कहते है।

जैसे यदि प्रतिदिन 20 पृष्ठ पढ़े जाए तो एक किताब 15 दिन में पढ़ी जाती है। प्रतिदिन 5 पृष्ठ पढ़े तो जैसे-जैसे दिनों की संख्या बढ़ेगी वैसे किताब के पृष्ठों की संख्या कम होगी।

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