27. छूट, कमीशन एव रिबेट
उपघटक -6.4
छूट, कमीशन एव रिबेट
इसे जानें
अंकित मूल्य (छपा मूल्य) : बेची जानेवाली वस्तु पर उस वस्तु का जो मूल्य छपा रहता उसे उस वस्तु का अंकित मूल्य (छपा मूल्य) कहते हैं। अंकित मूल्य को दर्शनी मूल्य भी कहते हैं?
छूट : दुकानदार किसी कारणवश वस्तु के अंकित मूल्य से कम मूल्य पर उसे बेचता है। वह अंकित मूल्य से जितनी राशि कम लेता है उसे छूट कहते हैं।
छूट = अंकित मूल्य – विक्रय मूल्य
छूट हमेशा प्रतिशत के रुप में बताया जाता है।
छूट = अंकित मूल्य x प्रतिशत छूट
उदा. 500 रुपये की साड़ी पर 10% छूट हो तो विक्रय मूल्य कितना
साड़ी पर मिलनेवाली छूट = अंकित मूल्य × प्रतिशत छूट
= 500 x 10%
= 500 × 10⁄100
=50 रुपये
विक्रय मूल्य = अंकित मूल्य – छूट
= 500 – 50 = 450 रुपये
दलाली, कमीशन, आढ़त :
विभिन्न वस्तु, मशीन या अनाज बिकवाने का कार्य कोई व्यक्ति या संस्था करती है। इस कार्य के बदले उस व्यक्ति या संस्था को जो राशि मिलती है उस राशि को कमीशन कहते हैं। कमीशन को भी प्रतिशत में ही बताया जाता है।
जब अनाज व्यापारी के पास बेचा जाता है तब किसान के पास या उत्पादक के पास जो राशि व्यापारी कमीशन के रुप में स्वीकार करता है उस राशि को आढ़त कहते हैं। इससे घर, पालतू पशु, वाहन, फ्लैट, भूमि इत्यादि की बिक्री करते समय ग्राहक मिलने में आसानी होती है। इसी तरह खरिदने व बेचने वाले संबंधित व्यक्तियो में जो व्यवहार बनाते हैं उन्हे दलाल या एजेंट कहते हैं। इस काम के लिए वह व्यक्ति जो मेहनताना लेता है, उसे दलाली या कमीशन कहते हैं।
दलाली ग्राहक से, मालिक से या दोनों से लिया जाता है।
रिबेट :
खादी ग्रामोद्योग मंडल, या विविध संस्थाओं से सामान उठाने के लिए छूट दिया जाता है। प्रत्यक्षरूप में दुकानदार ग्राहक से छूट के रुप में जो कम राशि लेता है उसकी भरपाई सरकार, मंडल या संस्था के द्वारा की जाती है। इस भरपाई की राशि को रिबेट कहते हैं।रिबेट की राशि व छूट की राशि एक ही होती है :
परंतु छूट ग्राहक को मिलता है तो रिबेट की राशि व्यापारी को भरपाई के रुप में मिलती है।
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