28. बैजिक व्यंजक
घटक 7 : बीजगणित
उपघटक - 7.1 : बैजिक व्यंजक
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♦ संख्या के स्थान पर किसी अक्षर का उपयोग कर बननेवाले गणितीय व्यंजक को बैजिक व्यंजक (राशि) कहते है। जिस व्यंजक (राशि) में सिर्फ गुणा की क्रिया होती है उस राशि को पद कहते हैं।
उदा- 5ab = 5×a×b.
♦ बैजिक राशि में आने वाले अक्षर को चर तथा चर के साथ वाली संख्या को गुणांक कहते हैं। यदि चर के साथ गुणाक नहीं दिया रहता तो उसका गुणाक हमेशा 1 होता है। जिस राशि में एक ही पद रहता है। उस राशि को एक पदी कहते हैं।
उदा. 3x, 17, -7mn
♦ जिस राशि दो पद होते हैं और इन पदों में जोड़ या घटाने की क्रिया होती है ऐसी राशियों को द्विपद कहते हैं।
उदा. 3a+b, 7-P
♦ जिस राशि में तीन पद होते हैं उस राशि को त्रिपद कहते हैं।
उदा. 7a+ 11b-6, m + m-7
चरों के भिन्न-भिन्न मान के लिए राशि का मान भिन्न-भिन्न मिलता है।
⇒ बजिक व्यंजकों (राशि) का जोड़ : समान (सजातीय) पदों को जोड़ते समय उन पदों के गुणांकों को जोड़कर उनके साथ चर लिखते हैं। विजातीय पदों का योग नहीं होता।.
⇒ बैजिक व्यंजकों का घटाना: किसी बैजिक व्यंजक में से दूसरे बैजिक व्यंजक को घटाना अर्थात् उस व्यंजक में दूसरे (व्यंजक) का विरुद्ध व्यंजक मिलाना होता है।
⇒ बैजिक व्यंजकों का गुणा: बैजिक व्यंजकों का गुणा करते समय पहले गुणांक का गुणा तथा बाद में चरों का गुणा करते हैं।
⇒ द्विपद में द्विपद का गुणा का अर्थ है, दो एकपदी के जोड़ अथवा घटाने में दो एक पदों के जोड़ अथवा घटाने से गुणा करना। द्विपदी से त्रिपद में गुणा का अर्थ है दो एक पदी के जोड़ अथवा घटाने में त्रिपद से गुणा करना।
⇒ बैजिक व्यंजकों का भाग: बैजिक व्यंजकों का भाग करते समय चर के घातांक हमेशा अवरोही क्रम में | लिखते हैं। शेष हमेशा भाजक से छोटा होता है। शून्य में किसी भी संख्या से भाग नहीं जाता है।
भाज्य = भाजक x भागफल + शेष
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