29. सर्वसमिका
उपघटक : 7.2 : सर्वसमिका
इसे जानें
समानता के जिस संबंध में चर के किसी भी मान के लिए बाँया पक्ष एवं दाहिना पक्ष हमेशा बराबर (समान) होते हैं ऐसे संबंध को सर्वसमिका कहते हैं।
समानता संबंध चर के किसी भी मान का समाधान करता है। बैजिक व्यंजकों के गुणनफल को विस्तार कहते
विस्तार के कुछ सूत्र
1) (a+ b)² = a² + 2ab+ b²
2) (a-b)² = a²- 2ab+ b²
3) a²+ b² = (a + b)² - 2ab
4) (a² - b²)= (a + b) (a-b)
5) (a + 1⁄a)²= a²+2+1⁄a²
6) (a - 1⁄a)²= a²-2+1⁄a²
7) (x+ a) (x+ b) = x²+ (a + b)x + ab
8) (a + b+ c)² = a² + b²+ c²+ 2ab+2bc + 2ca
9) (a + b)³ = a³ + b³+ 3ab (a + b) = a³ + 3a²b + 3ab²+b³
10) (a - b)³ = a³ - b³- 3ab (a - b) = a³ - 3a²b + 3ab²-b³
11) a³+ b³ = (a + b) (a²- ab+ b²)
12) a³- b³ = (a-b) (a² + ab+ b²)
13) (x+ a) (x-b) = x ²+ (a- b) x- ab
14) (x-a) (x+ b) = x² + (b-a) x - ab
15) a4- b4 = (a² + b²) (a²-b²)
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