३५. वाक्य के प्रकार
उपघटक - वाक्य के प्रकार
रचना की दृष्टि से वाक्य के भेद :
1) सरल वाक्य
2) संयुक्त वाक्य
3) मिश्र वाक्य
1) सरल वाक्य : इसे साधारण वाक्य भी कहते हैं, ऐसे वाक्यों में एक ही मुख्य क्रिया और एक ही विधेय होता है।
जैसे- यह कार मैंने सात लाख में खरीदी।
2) संयुक्त वाक्य : जिस वाक्य में दो या दो से अधिक उपवाक्य हों और वे समुच्चयबोधक अव्ययों से जुड़े हों तो उसे संयुक्त वाक्य कहते हैं।
जैसे- मैं पढ़ रहा है और वह सो रहा है। उन्हें न चलने में तकलीफ थी न साँस लेने में।
3) मिश्र वाक्य : जिन वाक्यों में एक स्वतंत्र उपवाक्य होता है और शेष उस पर आश्रित होते हैं, उन्हें मिश्र वाक्य कहते हैं। ये उपवाक्य समुच्चयबोधक अव्ययों से जुड़े होते हैं।
जैसे- क्योंकि, यद्यपि, चूंकि, मानो, यदि तो, तथापि, जब-तब, अर्थात, यहाँ तक, ताकि, जिससे, इस कारण आदि।
अर्थ की दृष्टि से वाक्य के प्रकार :
1) विधानार्थक
2) निषेधार्थक
3) आज्ञार्थक
4) प्रश्नार्थक
5) इच्छार्थक
6) संदेहार्थक
7) संकेतार्थक
8) विस्मयार्थक
1) विधानार्थक : जिस वाक्य में किसी बात के होने अथवा किसी के अस्तित्व की जानकारी प्राप्त हो, उसे विधानार्थक या सकारात्मक वाक्य कहते हैं।
जैसे- महात्मा गांधी को सभी जानते हैं।
दीपक विद्यालय जाएगा।
2) निषेधार्थक : जिस वाक्य से अर्थ के निषेध का भाव प्रकट हो, उसे निषेधार्थक वाक्य कहते हैं। इन वाक्यों में न, मत, नहीं आदि का प्रयोग होता है।
जैसे- पूनम विद्यालय नहीं जाएगी।
बच्चे वहाँ नहीं जाएँगे।
3) आज्ञार्थक : जिस वाक्य में आज्ञा, आदेश, अनुमति, प्रार्थना, विनय आदि का बोध हो, उसे आज्ञार्थक वाक्य कहते हैं।
जैसे- सभी शिक्षक अपनी कक्षा में जाएँ। तुम विद्यालय से बाहर जाओ।
4) प्रश्नार्थक : जिस वाक्य में प्रश्न पूछने का भाव प्रकट हो, उसे प्रश्नार्थक वाक्य कहते हैं। इसमें, क्या, कहाँ, कैसे, कब, क्यों आदि प्रश्नार्थक शब्दों का प्रयोग होता है और प्रश्नवाचक चिह्न (?) का प्रयोग होता है।
जैसे- आप घर कब जा रहे हैं? वह कहाँ घूमने जाएगा?
5) इच्छार्थक : जिस वाक्य से इच्छा, आशीर्वाद, शुभकामना आदि का भाव प्रकट हो, उसे इच्छार्थक वाक्य कहते हैं।
जैसे- भगवान तुम्हारा भला करें। आपकी यात्रा मंगलमय हो।
6) संदेहार्थक : जिस वाक्य में कार्य के होने में संदेह हो, उसे संदेहार्थक वाक्य कहते हैं। जैसे- शायद आज पानी बरसे। उसे मेरी पुस्तक मिल गयी होगी।
7) संकेतार्थक : जिस वाक्य से संकेत अथवा अपेक्षा का बोध हो, तो उसे संकेतार्थक वाक्य कहते हैं।
जैसे- यदि तुम परीक्षा में मेहनत करते तो अनुत्तीर्ण न होते। यदि अच्छी बरसात हुई होती तो फसल अच्छी होती।
8) विस्मयार्थक : जिस वाक्य में आश्चर्य, हर्ष, शोक, घृणा आदि का भाव प्रकट हो, उसे विस्मयार्थक वाक्य कहते हैं।
जैसे- अरे! तुम गए क्यों नहीं? ओह! कितना तेज बुखार है।
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