२६. क्रिया
उपघटक - क्रिया
जिस शब्द से किसी कार्य का करना या होना प्रकट हो, उसे क्रिया कहते हैं। जैसे- पढ़ना, लिखना, रोना, बैठना, उठना, हँसना, जाना आदि।
क्रिया के भेद :
1) अकर्मक क्रिया : जिन क्रियाओं का फल सीधे कर्ता पर पड़ता है, उन्हें अकर्मक क्रिया कहते हैं। अकर्मक अर्थात् कर्म के बिना। जैसे- बच्चा हँसता है। तुम जाते हो। लड़का रोता है।
2) सकर्मक क्रिया : जिन क्रियाओं का फल सीधे कर्म पर पड़ता है, उन्हें सकर्मक क्रिया कहते हैं। सकर्मक अर्थात कर्म के साथ। जैसे- दीपा खाना खाती है। रमेश पुस्तक पढ़ता है। देना, पूछना, गाना, पीना, मारना, दखना,
धोना आदि सकर्मक क्रियाएँ हैं।
3) सहायक क्रिया : जो क्रिया वाक्य में मुख्य क्रिया की सहायता करती है, उसे सहायक क्रिया कहते हैं। जैसे- उसनेमुझे गले लगा लिया है। औरत अचानक गिर पड़ी। ‘लिया है' और 'पड़ी' सहायक क्रियाएँ हैं।
4) संयुक्त क्रिया : मुख्य क्रिया के बाद आई हई सहायक क्रिया को सम्मिलित रूप से संयुक्त क्रिया कहत है। जैसे मैं कविता का अर्थ समझ गया। इस वाक्य में 'समझ' मुख्य क्रिया और ‘गया' सहायक क्रिया है। दोनो का एक
साथ संयुक्त क्रिया कहते हैं।
5) प्रेरणार्थक क्रिया : जो क्रिया स्वयं न करके दूसरे से संपन्न कराई जाती है, उसे प्रेरणार्थक क्रिया कहते हैं। इसके दो भेद हैं
क) प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया : जहाँ कर्ता खुद काम में शामिल होकर प्रेरणा देता है, वहाँ प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया होती हैं। जैसे- माँ बच्चे को दूध पिलाती है।
ख) द्वितीय प्रेरणार्थ क्रिया : जहाँ कर्ता खुद काम न करके किसी दूसरे को करने के लिए प्रेरित करता है। अर्थात दूसरे से करवाता है, वहाँ द्वितीय प्रेरणार्थक होती है। जैसे- माँ बच्चे को नौकरानी से दूध पिलवाती है।
| मूल क्रिया | प्रथम प्रेरणार्थक क्रिया | द्वितीय प्रेरणार्थक क्रिया |
लिखना पढ़ना पीना जीना लूटना | लिखाना पढ़ाना पिलाना जिलाना लुटाना | लिखवाना पढ़वाना पिलवाना जिलवाना लुटवाना |
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