२३. संज्ञा
उपघटक - संज्ञा
किसी व्यक्ति, वस्तु, स्थान, पर्वत, देश, दिशा, ग्रह, नक्षत्र, नदी, सड़क आदि के नाम को संज्ञा कहते हैं।
संज्ञा के भेद :
1) व्यक्तिवाचक संज्ञा : जिस शब्द से किसी विशेष प्राणी, वस्तु, स्थान के नाम का बोध होता है, उसे व्यक्ति वाचक संज्ञा कहते हैं।
जैसे- राम, महेश, शीला, हिमालय, रामायण, दिल्ली, अमेरिका, पूरब, सूर्य आदि।
2) जातिवाचक संज्ञा : जिस संज्ञा शब्द से किसी एक जाति के सभी प्राणियों, वस्तुओं एवं स्थानों का बोध होता है, उसे जातिवाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे- आदमी, औरत, जानवर, फूल, हाथी, पहाड़, नदी, पुस्तक आदि।
3) भाववाचक संज्ञा : जिस संज्ञा शब्द से किसी व्यक्ति या वस्तु के गुण, दोष, भाव, अवस्था आदि का बोध होता है, उसे भाववाचक संज्ञा कहते हैं। जैसे- मित्रता, बुढ़ापा, लड़कपन, बनावट, अच्छाई, बुराई, हँसी आदि।
4) पदार्थ या द्रव्यवाचक संज्ञा : जिस संज्ञा से किसी पदार्थ या द्रव्य के नाम का बोध होता है, उसे पदार्थवाचक या द्रव्यवाचक संज्ञा कहते हैं।
जैसे- लोहा, ताँबा, सोना, दूध, पानी, गेहूँ, घी, कोयला, चाँदी आदि।
5) समूह या समुदायवाचक संज्ञा : जिस संज्ञा शब्द से किसी समूह या समुदाय के नाम का बोध होता है, उसे समूहवाचक संज्ञा कहते हैं।
जैसे- भीड़, कक्षा, झुंड, कतार, श्रेणी, सेना, दल, गुच्छा, कक्षा आदि।
नोट :
1) जातिवाचक संज्ञा का बहुवचन होता है, किंतु व्यक्तिवाचक संज्ञा का बहुवचन नहीं होता है।
जातिवाचक संज्ञा : बच्चा-बच्चे, किताब-किताबें, लड़का-लड़के
व्यक्तिवाचक संज्ञा : सूर्य-सूर्य, गौरव-गौरव, मीना-मीना
2) भाववाचक संज्ञा का भी बहुवचन नहीं होता है।
उदाहरण : सौंदर्य, भव्यता, सुंदरता
3) व्यक्तिवाचक संज्ञा एवं जातिवाचक संज्ञा में प्रत्यय लगाकर भाववाचक संज्ञा बनाई जाती है।
उदाहरण : गुलाम-गुलामगिरी, मीठा-मिठास, सुंदर-सुंदरता
4) भाववाचक संज्ञा का उपयोग व्यक्तिवाचक संज्ञा की तरह किया जाता है।
जैसे- विश्वास मेरा अच्छा मित्र है।
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