१०. मुहावरे 

 

मुहावरे 

इसे जानें -

 ☞  'मुहावरा' शब्द अरबी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है ‘अभ्यास'।

 ☞ हिंदी में मुहावरा शब्द का प्रयोग विशेष अर्थ में किया जाता है। ‘मुहावरा' शब्दों का वह समूह है, जिसका प्रयोग प्रत्यक्ष रुपमें नहीं किया जाता। इसका प्रयोग लाक्षणिक अर्थ में होता है।

 ☞ भाषा को रोचक, सुंदर एवं प्रभावपूर्ण बनाने का काम मुहावरे बखूबी करते हैं।

 ☞  जब कोई वाक्यांश अपने सामान्य अर्थ को छोड़कर किसी विशेष अर्थ में रूढ़ हो जाता है तो उसे मुहावरा कहते हैं।

 ☞ मुहावरे वाक्य के अंश होते हैं। ये पद के रूप में भी होते हैं। ये साधारण अर्थ का बोध न कराकर किसी विशेष अर्थ का ही बोध कराते हैं। मुहावरों का उपयोग हमेशा प्रसंग के अनुरुप ही किया जाता है, मगर इनके प्रयोग से भाषा की अभिव्यंजना-शक्ति दो गुनी हो जाती है। वाक्यों में प्रयोग करने पर मुहावरों | की क्रिया, लिंग, कारक आदि के अनुसार बदल जाती है।


प्रमुख मुहावरे और उनका वाक्यों में प्रयोग

१.अंग-अंग ढिला होना ( बहुत थक  जाना)-सुबह से शाम तक काम करते-करते अब तो  अंग-अंग ढीला हो गया है ।

२.अंधे की लाठी (एकमात्र सहारा )-राहुल अपनी विधवा माँ की अंधे की लाठी है।

३.अंगार उगलना ( क्रोधवश कटु शब्द  बोलना)- मेरे छोटे भाई  ने एसे अंगार  उगले , जिन्ह मै  कभी  नही भूल सकगी।

४. अंगारों पर पैर रखना (जान-बूझकर विपत्ति सहना -दिलेर सिंह जैसे दुस्साहसी व्यक्ति से भिड़कर, तुम   अंगारो   पर पैर रखने का प्रयत्न कर रहे हो।

५.अंगूठा दिखाना (साफ इनकार कर देना)-मैंने राहुल से उसकी पुस्तक मांगी तो उसने अंगूठा दिखा दिया।

६.अंधेरे घर का उजाला (होनहार पुत्र, जिस पर आशाएँ टिकी हों )-सुजाता के तीनों पुत्रों में से महेश ही अँधेरे घर उजाला है।

७.अंधेरगदी मचाना (लूट मचाना/अन्याय करना)-आजकल सभी राजनेताओं ने अंधेरगर्दा मचा रखी है।

८.अक्ल का दुश्मन (मूर्ख)-मनोज तो अक्ल का दुश्मन है, उससे किसी समझदारी की उम्मीद मत करना।

९. अपना उल्लू सीधा करना (स्वार्थ सिद्ध करना)-दिनेश तो सभी को मूर्ख बनाकर अपना उल्लू सीधा करता रहता है।

१०.अपनी खिचड़ी अलग पकाना (सबसे अलग रहना)-भारत के छोटे-छोटे राज्य अपनी अलग खिचडी पकाते है। इसलिए अंग्रेजों ने उन्हें आसानी से नष्ट कर दिया।

११.अपना ही राग अलापना (अपनी ही बात कहते जाना)-आजकल सभी अपना ही राग अलापते हैं। कोई किसी को कुछ नहीं सुनता।

१२.अगर-मगर करना (टाल-मटोल करना)-अगर-मगर मत करो। काम करना है तो करो वर्ना चलते बनो।

१३.अक्ल पर पत्थर पड़ना (अज्ञान से काम लेना)-न जाने क्यों उस समय मेरी अक्ल पर पत्थर पड़ गए थे, जो मैंने अपने भाई को इतने कटु शब्द कह दिए।

१४.अक्ल का पुतला (बुद्धिमान)-आजकल के विदयार्थी अपने-आप को अक्ल का पुतला समझते हैं।

१५.अपना-सा मुंह लेकर रह जाना (असफलता से लज्जित होना)-खेल में हार जाने के कारण विद्यार्थी अपना-सा । मुँह लेकर रह गए।

१६.अपने पाँव पर कुल्हाड़ी मारना (स्वयं विनाश को आमंत्रण देना)-पढ़ाई ठीक ढंग से न करके विद्यार्थी स्वयं अपन पाँव पर कुल्हाड़ी मारते हैं।

१७.अपने मुंह मियाँ मिठू बनना (अपनी प्रशंसा आप करना)-आजकल के नेता अपने मुँह मियाँ मिट्ठू बनते है

१८.अपने पैरों पर खड़ा होना (अपने सहारे अपना कार्य करना)-लालबहादुर शास्त्री ने बचपन से ही अपने । खड़ा होना सीख लिया था।

१९. अठखेलियाँ मुड़ाना ( दिल्लगी करना)-वहाँ तुम्हारे पिता जी अस्वस्थ हैं और यहाँ तुम्हें अठखेलियों सूझ रही है

२०.आँखे खुलना ( होश आना )-आठवीं की वार्षिक परीक्षा में अनुत्तीर्ण हो जाने के बाद मेरी आँखें खुल गई.

२१.आँखें तस्सना (देखने के लिए जी चाहना)-विदेश में गए हए अपने बेटे को देखने के लिए उसकी आंखे तरस गई .

२२.आँख फेर लेना (उदासीन हो जाना)-उसने अपने बेटे की ओर से आँखें फेर ली हैं।

२३.आँखों का तारा (अति प्रिय)-वह तो अपनी माँ की आँखों का तारा है।

२४.आंच न आने देना (तनिक कष्ट न होने देना)-हमारे देश के नाम पर आँच न आने देने के लिए कुछ कर गुजरना चाहिए।

२५.आँसू पीकर रह जाती है। ("चुप रह जाना)-अपने बच्चों को पेटभर रोटी देने में असमर्थ विधवा माँ आँसू पीकर रह जाती है।

२६.आकाश के तारे तोड़ना (असभव काम करना) - हर प्रेमी अपनी प्रेमिका के लिए आकाश के तारे तोड़कर लाने के वायदे करता है।

२७.आकाश-पाताल का अंतर (बहुत अधिक अंतर)-रवि और रमेश के स्वभाव में आकाश-पाताल का  अंतर होना ।

२८. आग में घी डालना (क्रोध को भड़काना) -माँ तो पहले से ही नाराज थीं। तम्हारी शिकायत ने आग में घी डालने का काम कर दिया।

२९.आड़े हाथा लना (कठोरता से पेश आना)-पुत्र के रात को देर से घर आने पर पिता ने उसे आड़े हाथों लिया।।

३१.आस्तीन का साप  ( कपटी मित्र, धोखेबाज)-मैं नहीं जानता था कि राजीव आस्तीन का साँप निकलेगा।

३२.आटे-दाल का भाव मालूम हाना (कष्ट का अनुभव होना)-अभी तो पिता का धन उडाते हो; जब अपने पैरों पर। खड़े होगे, तब आटे-दाल का भाव मालूम होगा।

३३.आग लगाना (उपद्रव मचाना, शांति नष्ट करना)-दष्ट व्यक्ति हर जगह आग लगाते रहते हैं।

३४.आग-बबूला हाना (अति क्रोध में आ जाना)-अपने पुत्र की धृष्टता पर पिता आग-बबूला हो गए।

३५.आकाश-पाताल एक करना (अति कठिन परिश्रम करना)-आकाश-पाताल एक करके उसने सफलता प्राप्त की है।

३६.आसमान टूट पड़ना (अकस्मात् महान विपत्ति आना)-पत्र की अकाल मृत्यु का समाचार सुनकर माँ पर जैसे। आसमान टूट पड़ा हो।

३७.आसमान सिर पर उठाना (अधिक कोलाहल करना)-पिता के घर से जाते ही बच्चों ने आसमान सिर पर उठा लिया।

३८.इंट से ईंट बजाना (पूर्ण रूप से नष्ट करना)-नादिरशाह ने दिल्ली में ईंट से ईंट बजा दी।

३९.इंट का जवाब पत्थर से देना (दुष्ट से दुष्टता करना)-आज के युग में वही सफल होता है, जो ईंट का जवाब पत्थर से देता है।

४०.ईद का चाँद होना (कठिनाई से दिखाई देना)-दो महीने बाद मिले अपने मित्र से श्याम ने कहा कि तुम तो ईद का चाँद हो गए हो।

४१.ईमान बेचना (बेईमान होना)-आज के नेताओं ने अपना ईमान बेच दिया है।

४२.उलटी गंगा बहाना (नियम विरुद्ध कार्य करना)-आलसी रामू ने ढेर-सा काम कर आज उलटी गंगा बहा दी।

४३.उड़ती चिड़िया पहचानना (दिल की बात समझ लेना)-हमसे चाल चलने से क्या लाभ? हम तो उड़ती चिड़िया पहचान लेते हैं।

४४.उल्लू बनाना (मर्ख बनाना)-श्याम राम को उल्ल बनाकर अपना काम निकाल रहा है।

४५.उल्लू सीधा करना (स्वार्थ सिद्ध करना)-नेता लोग अपना उल्लू सीधा करने के लिए झूठे वादे करते हैं।

४६. उँगली पर नचाना (वश में रखना)-आजकल के नेता राजनीति को अपनी उँगली पर नचा रहे हैं।

४७.उंगली उठाना (हानि पहुँचाने की चेष्टा करना)-हमारे रहते तुम पर उँगली उठाने का किसी में साहस नहीं है।

४८.एक लाठी से हाँकना (अच्छे बरे का अंतर न करना)-क्या शिक्षित क्या अशिक्षित-तुम तो सभी को एक ही लाठी से हाँकते हो।

४९.एड़ी-चोटी का जोर लगाना (खुब दौडधूप करना)-नौकरी की तलाश में मोहन ने एड़ी चोटी का जोर लगा दिया।

५०.कंगाली में आटा गीला होना (गरीबी में और अधिक हानि होना)-नौकरी तो पहले ही छूट गई, ऊपर से पत्नी को बीमारी ने घेर लिया। कंगाली में आटा गीला होता ही है।

५१.कंधे से कंधा मिलाना (आपस में सहयोग करना)-  आजकल स्त्रियाँ हर क्षेत्र में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर  चल रही है ।

५२.कमर कसना (किसी काम को करने का दृढ निश्चय करना)-रामू ने अपने व्यवसाय को ऊपर लाने के लिए कमर कस ली है।

५३.कमर टूटना (हतोत्साहित हो जाना)-पत्र की अकाल मृत्यु से वृद्ध पिता की कमर टूट गई।

५४.कमर सीधी करना (थकान मिटाना)- अब पहले कमर सीधी करने के बाद ही आगे काम होगा।

५५.कलेजा फटना ( बहुत दुुुखख होना)- वधु  पिता को रोते देख मेरा कलेजा फट गया।

५६.कलेजा मुँह को आना (मन विकल/दुखी होना)- उसकी दर्दभरी कहानी सुनकर कलेजा मुँह को आ गया।

५७. कसौटी पर कसना (परीक्षा लेना)-चरित्र की कसौटी पर कसने से ही मनुष्य का वास्तविक मूल्य प्रकट होता है।

५८. कफ़न सिर पर बाँधना ( मरने के लिए तैयार रहना)-स्वतंत्रता संग्राम के दिनों में क्रांतिकारी सिर पर कफ़न बाँध का निकलते थे।

५९.कलई खुलना (भेद खुलना)-सी०बी०आई० के छापों ने बड़े-बड़े अफ़सरों की कलई खोल दी।

59. कलेजा ठंडा होना (मन में शांति पाना)-दुश्मनों को हराकर ही मेरा कलेजा ठंडा होगा।

६०. कलेजे का टुकड़ा (अत्यधिक प्रिय)-हर बच्चा अपने माँ-बाप के कलेजे का टुकड़ा होता है।

६१. कलेजे पर पत्थर रखना (धीरज रखना)-पति की मृत्यु के बाद श्यामा को कलेजे पर पत्थर रखना पड़ा।

६२. कन्नी काटना (बचना)-जब से कमल ने बुरा व्यवहार किया है, करण उससे कन्नी काटने लगा है।

६३. कमर टूटना (हिम्मत टूट जाना)-जवान बेटे की मृत्यु के बाद दीनानाथ की कमर टूट गई।

६४. कान पर जूंन रेंगना (असर न होना)-कितना भी समझा लो लेकिन आज के बच्चों के कानों पर तक नहीं रेंगती।

६५. कानों-कान खबर न होना (बिलकुल खबर न होना)-पंकज ने विवाह भी कर लिया और किसी को कानों-कान खबर न हुई।

६६. कान कतरना ( बहुत अधिक चालाक होना )-विवेक तो आजकल बड़े-बड़ों के कान कतरने लगा है।

६७. कालिख पोतना (बदनाम करना)-भावेश ने चोरी करके अपने पिता के नाम पर कालिख पोत दी है।

६८. काम तमाम करना (मार डालना)-तलवार के एक ही वार से शत्रु का काम तमाम हो गया। ।

६९. कान का कच्चा होना (बिना सोचे-विचारे किसी पर विश्वास करना)-मनुष्य को कभी भी कान का कच्चा नहीं होना चाहिए।

७०. कान भरना (चुगली करना)-कान के कच्चे हो तभी उसने तुम्हारे कान भर दिए।

७१. कानाफूसी करना (चुपके-चुपके बातें करना)-तुम दोनों को कानाफूसी करते हुए बहुत देर से देख रहा हूँ।

७२. किताब का कीड़ा (हर समय पढ़ते रहने वाला)-पूर्णिमा तो किताब का कीडा है। उससे पिक्चर चलने की उम्मीद  मत करना।

७३. कुत्ते की मौत मरना (बुरी मौत मरना)-देशद्रोही ! अब तुम्हें कुत्ते की मौत मारा जाएगा।

७४.खरी-खरी सुनाना (स्पष्ट और कठोर वचन कहना)-विशाल किसी से नहीं डरता। वह सभी को खरी - खरी सुना देता है।

७५. खाक छानना (भटकना)-लगता है, सारी दिल्ली की खाक छानकर आए हो।

७६. खाक में मिलाना (नष्ट करना)-घर से भागकर शीला ने अपने पिता की इज्जत को खाक में मिला दिया।

७७. खिल्ली उड़ाना (हँसी उड़ाना)-बिना मतलब किसी की खिल्ली उडाना अच्छी बात नहीं।

७८. खून का घूट पीना (क्रोध को भीतर ही भीतर सहना)-अपने क्रोधी स्वभाव के कारण हए नुकसान के बाद अब मेहता जी ने खून का घूट पीना सीख लिया है।

७९. खून का प्यासा (भयंकर शत्रु)-पाकिस्तान हमेशा ही हिंदुस्तान के खन का प्यासा रहा है।

८०. खून सुखना (डर जाना)- बेटे  का कार का एक्सीडेंट हआ यह सनकर शर्मा जी का खन सूख गया।

८१. खून-पसीना एक करना (कठोर परिश्रम करना)-खून-पसीना एक करके मजदूर अपने लिए दो वक्त की रोटी जुटा पाना |

८२. ख्याली पुलाव पकाना (कपोल कल्पनाओं में डूबे रहना)-कुछ काम भी करो। ख्याली पुलाव पकाने से कुछ नहीं होगा।

८३.  गंगा नहाना (बड़ा कार्य पूर्ण करना)-पुत्री का विवाह संपन्न होने के बाद माता-पिता को लगा कि मानो वे गंगा। नहा लिए हैं।

८४. गर्दन झुकना (लज्जित होना)-पुत्र जब चोरी करते हुए पकड़ा गया तो पिता की गर्दन झुक गई।

८५. गजभर की छाती होना (गौरव से भर जाना)-पुत्र के प्रथम आने पर माता-पिता की छाती गजभर की हो गई।

८६. गर्दन उठाना (विरोध करना)-1857 की क्रांति के बाद भारतवासियों ने अंग्रेजों के सामने गर्दन उठाना शुरू कर दिया था।

८७. गर्दन पर सवार होना (पीछे पड़े रहना)-पैसों के लिए हर समय बच्चे माँ की गर्दन पर सवार रहते हैं।

८८. गले पड़ना (मुसीबत पीछे पड़ना)-गरीब दयाराम की एक बार मदद क्या की वह तो गले पड़ गया।

८९. गले का हार (प्रिय वस्तु)-जासूसी उपन्यास तो आजकल रोहण के गले का हार बन गए हैं।

९०. गड़े मुर्दे उखाड़ना (पुरानी बातें दोहराना)-जब तुम लोगों में समझौता हो ही गया है तो फिर छोड़ो, गड़े मुर्दे उखाड़ने से क्या फायदा?

९१. गाँठ बाँधना (अच्छी प्रकार याद रखना) मेरी बात गाँठ बाँध लो, कभी गलत रास्ते पर मत जाना।

९२.  गाल बजाना (बकवास करना)-गाल बजाते फिरते हो, कोई ठोस कार्य क्यों नहीं कर दिखाते।

९३.  गागर में सागर भरना (थोडे शब्दों में बहुत भाव भर देना)-इस कविता में तो मानो कवि ने गागर में सागर भर दिया हो।

९४. गिरगिट की तरह रंग बदलना (सिदधांतहीन होना)-हेमा का विश्वास मत करना, वह तो गिरगिट की तरह रंग बदलती है।

९५. गीदड भभकी (व्यर्थ की धमकी ) मकान मालिक की गीदड़ भभकी से डरने की जरूरत नहीं है। वह तम्हारा कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

९६. गूंगे का गुड़ ( मात्र अनुभव)-इस कविता का अध्ययन तो गूंगे का गुड़ है।

९७. घडो पानी पड़ना (अधिक लज्जित होना)-अपने फेल होने का सूचना सुनकर रमश पर घड़ा पानी पड़ गया।

९८. घर का उजाला (इज्जत बढ़ाने वाला)-राजेंद्र में अनेक खूबियाँ हैं, वही तो घर का उजाला है।

९९. गोबर कर देना (काम बिगाड देना)-मेरा काम बन ही चुका था, पर उसने आकर सब गुड़-गोबर कर दिया।

१००. घाट का पानी पीना ( बहुत घुम फिरकर अनुभव प्राप्त करना)-घाट-घाट का पानी पीकर ही आज व इतना आगे आया है।

१०१. घाव पर नमक छिडकना (दुखी को अधिक दुखी करना)-वह पहले ही दुखी है फिर पुरानी बातें याद करवाकर उसके घाव पर नमक छिड़कना ठीक नहीं।

१०२. घी के दिए जलाना (खुशियाँ मनाना)-जब भैया विदेश से इंजीनियर का डिग्री  लेकर आए तो घी के   दिए जलाए गए।

१०३. घोड़े पर सवार होना ( शीघ्रता  में होना)-दिनेश जब देखो तब घोड़े पर सवार होकर आता है। कभी रूकता नहीं है।

१०४. घोड़े बेचकर सोना (निश्चित रहना)-उसे किसी की कोई परवाह नहीं, वह तो घोड़े बेचकर सोता है।

१०५. चंपत हो जाना (गायब हो जाना)-पुलिस को आते देख चोर चंपत हो गया।

१०६. चाँद पर थूकना (निर्दोष पर दोष लगाना)-उस महात्मा के चरित्र पर गलत बात कहना चाँद पर थूकने है। बराबर है।

१०७. चांदी होना (लाभ ही लाभ होना)-जब से संदरलाल ने नया व्यवसाय शुरू किया है, उसकी चाँदी हो गई है।

१०८. चादर तानकर सोना (निश्चित हो जाना)-परीक्षा समाप्त होते ही करण चादर तानकर सो गया है।

१०९. चार सौ बीस होना (धोखेबाज होना)-पडोसी रामदीन का विश्वास मत करना, वह तो चार सौ बीस है।

११०. चार चाँद लगाना (अत्यधिक शोभा बढ़ाना)-ताजमहल इस देश की सुंदरता को चार चाँद लगाता है।

१११. चादर से बाहर पाँव पसारना (आय से बढ़कर व्यय करना)-चादर से बाहर पाँव पसारने से कुछ नहीं होगा, थोड़ा । तंगी में जीना सीखो।

११२. चिकनी-चुपड़ी बातें करना (खुशामद करना)-मैं तुम्हारी चिकनी-चुपड़ी बातों में आने वाला नहीं, अब तो अपना काम पूरा करके ही रहूँगा।

११३. चिकना घड़ा होना (बेअसर होना)-आजकल के बच्चे चिकने घड़े होते हैं। उन पर किसी बात का कोई असर नहीं होता।

११६. चींटी के पर निकलना (छोटे व्यक्ति का घमंड करना)-पैसे आते ही हलवाई प्यारेलाल भी सर चढ़कर बोलने लगा है, लगता है चींटी के पर निकल आए हैं।

११७. चुल्लूभर पानी में डूब मरना (अत्यंत लज्जित होना)-चोरी करके तमने ऐसा कार्य किया है कि तुम्हें चुल्लूभा पानी में डूब मरना चाहिए।

११८. चेहरा उतरना (निराशा का अनुभव करना)-अपनी असफलता की खबर सुनकर उसका चेहरा उतर गया।

११९. चेहरे पर हवाइयाँ उड़ना (घबरा जाना)-पुलिस को सामने देख चोर के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगा।

१२०. चैन की बंसी बजाना (आनंद से जीवन बिताना)-रिटायर होने के बाद अब वह चैन की बंसी बजा रहा है

१२१. चोली-दामन का साथ (अत्यंत घनिष्ठता होना)-मोहन और सोहन इतने गहरे मित्र हैं कि उनका तो चाला का साथ है।

१२२. छठी का दूध याद आना (भारी संकट पड़ना)-अब तक पिता की कमाई पर ऐश करते रहे. जब खुद कमाना पडेगा तो छठी का दूध याद आ जाएगा।

१२३. छक्के छडाना (साहस खोना) -भारतीय क्रिकेट टीम ने पाकिस्तानी टीम के छक्के छडा दिए।

१२४. छप्पर फाड़ कर देना (बिना मेहनत के बहुत देना)-दखी क्यों होते हो भगवान जब देगा तो छप्पर फाड कर देता है |

१२५. छाती पर सॉप लाटना (ईष्या होना)-सुरेश को कक्षा में प्रथम आया देख रमेश की छाती पर सांप लोटने लगा

१२६. जबान बदलना (कही हुई बात से बदल जाना) - क्षत्रिय लोग कभी अपनी जबान से नहीं बदलते

१२७. जान में जान आना - दो घंटे से रमेश का इंतजार हो रहा था, उसे सही-सलामत घर आया देख सभी की जान में जान आ गई।

१२८. जी चुराना (काम से  बचने  लिए बहाना बनाना )-रमेश सदा काम करने से जी चुराता है।

१२९. जी-छोटा होना ( उत्साह कम होना)-बच्चों को उनके मनपसंद काम न करने देने से उनका जी छोटा होता है।

१३०. जोड-तोड़ करना ( उपाय करना ) - सुधीर जोड़-तोड़ कर अपना घर चला रहा है।

१३१. टांग अड़ाना ( हस्तेक्षेप करणा ) - बड़े जब बात कर रहे हों तो बच्चों का बीच में टाँग अडाना अच्छी बात नहीं।

१३२. टूट पड़ना (सहसा आक्रमण कर देना)-राजपूत योदधा अकबर की सेना पर टूट पड़े।

१३३. टेढी उंगली से घी निकालना (शक्ति से कार्य सिद्ध करना) - यदि तुम अपना काम करवाना चाहते हो, तो कड़ाई। से काम लेना होगा, बिना उंगली टेढी किए घी नहीं निकलेगा।

१३४. टेढ़ी खीर (कठिन कार्य) - डॉक्टर बनना बड़ी टेढ़ी खीर है।

१३५. ठेस लगना (दुख होना)-जब कोई अपना धोखा देता है तो बड़ी ठेस लगती है।

१३५ . ठोकर खाना (हानि उठाना)-उसे अपना काम स्वयं करने दो, ठोकर खाकर ही कुछ सीख पाएगा।

१३६. ठोक बजाकर (जाँच कर)-किसी भी व्यक्ति से ठोक बजाकर ही संबंध स्थापित करने चाहिए।

१३७.  डंके की चोट पर कहना (खुलेआम कहना)-मैं डंके की चोट पर कह रहा है कि मेरे भाई ने कोई बुरा काम नहीं किया है।

१३८. डकार जाना (हड़प लेना, ली हुई वस्तु वापस न करना)-मोहन का सौतेला भाई पिता के मरने पर सारी संपत्ति डकार गया।

१३९. डूबते को तिनके का सहारा होना (संकटग्रस्त व्यक्ति को कुछ सहायता प्राप्त होना)-इस संकट के समय में तुम्हारा साथ, मेरे लिए डूबते को तिनके का सहारा है।

१४०.  ढेर करना (मार गिरा देना)-भारत की नौसेना ने दुश्मनों को ढेर कर दिया। ।

१४१. तिलों में तेल न होना (काम न होने की या कुछ मिलने की आशा न होना)-कपूत को चालाकी से रुपये मांगते देख माँ ने कहा कि इन तिलों में तेल नहीं है. जाकर अपना दाँव कहीं और लगाओ।

१४२.  तिल को ताड़ करना  (साधारण बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना)-मजाक को समझना सीखो, तिल को ताड करने की। आवश्यकता नहीं।

१४३. तीन-तेरह होना (तितर-बितर होना)-वीर राजपूत सिपाहियों के सामने शत्रुओं की सेनाएँ तीन-तेरह हो गई।

१४४.  तूती बोलना (धाक बैठना)-भारतीय सैनिकों की हर जगह तूती बोलती है।

१४५. थूककर चाटना (बदल जाना)-थूककर चाटना राजपूतों की शान के खिलाफ़ है।

१४६. दांत खट्टे करना (हराना)-भारतीय सेना के जवानों ने दुश्मनों के दाँत खट्टे कर दिए।

१४७. दांतों तले उंगली दबाना (आश्चर्य करना)-ताजमहल की भव्यता व सुंदरता को देखकर विदेशी भी दाँतों तले उँगली दबा लेते हैं।

१४८. दाँत पीसना (क्रोध करना)-वह बेचारा दाँत पीसकर रह गया।

१४९.  दाँत काटी रोटी होना (गहरी मित्रता होना)-शीला और सुषमा की क्या पूछते हो, उनकी तो आपस में दाँत काटी रोटी है।

१५०. "दाल न गलना (काम न बनना)-मोहन दिनेश से एक बड़ी रकम हड़पना चाहता था, लेकिन उसकी दाल न गली।

१५१. दाल में काला होना (संदेह होना)-समय देकर वह अब तक नहीं आया,  लगता है दाल में कुछ काला है।

१५२. दिमाग में भूसा होना (पूर्णतः मूर्ख होना)-दिमाग में भूसा होने के कारण रमा आठवीं कक्षा में दो बार फेल हो गई।

१५३.  दूज का चाँद होना (बहुत दिनों बाद दिखाई देना)-बहुत बार तुमसे मिलन का प्रयत्ल किया लेकिन तुम मिले नहीं तुम तो आजकल दूज का चाँद हो रहे हो।

१५४. धरती पर पाव  न  पड़ना (अभिमान से भरा होना)-रजिया अपनी सुंदरता पर इतराती है। आजकल तो उसके धरती पर पाँव नहीं पड़ते।

१५५. बुन का पक्का (निश्चय पर स्थिर रहने वाला) शीला अपनी धन की पक्की है. इस बार कक्षा में अवश्य प्रथा आएगी।

१५६. नजरों से गिरना (अप्रिय होना)-जब से आशीष नकल करते पकड़ा गया है, तभी से अध्यापकों की नजरों में गिर गया है।

१५७. नमक मिर्च लगाना (बढ़ा-चढाकर बात बताना)-रमा की बात का क्या विश्वास । वह हर बात नमक मिर्च लगाया कहती है।

१५८. नाक कटना (बेइज्जती होना)-बेटी घर से क्या भागी, दीनानाथ की तो नाक कट गई।

१५९. नाक पर मक्खी न बैठने देना (अपने ऊपर कोई संकट न आने देना)-दिव्या की सास तो कभी अपनी नाक पर मक्खी नहीं बैठने देती।

१६०.  नाक-भौं चढ़ाना (घृणा प्रकट करना)-आजकल बच्चों को होटल का खाना ही पसंद है। घर का खाना देखते हो । वे नाक-भी चढ़ाते हैं।

१६१. नाक में दम करना (बहुत परेशान करना)-कुछ शैतान बच्चों ने अध्यापक की नाक में दम कर रखा है।

१६२.  नाक रगड़ना (बड़ी दीनता से प्रार्थना करना)-उसके बार-बार नाक रगड़ने पर मुझे उसे नौकरी देनी ही पड़ी।

164. नाकों चने चबाना (बहुत कठिन कार्य करना)-कक्षा में प्रथम आने के लिए कवींद्र को नाकों चने चबाने होंगे।

165. नानी याद आना (होश ठिकाने आ जाना)-देखने में तो आसान काम था, लेकिन पूरा करने में नानी याद आ गई।

१६७.  नौ-दो ग्यारह होना (भाग जाना)-पुलिस की आहट पाते ही चोर नौ-दो ग्यारह हो गए।

१६८. पत्थर की लकीर (दृढ़)-वह कभी झूठ नहीं बोलता, उसने जो कुछ भी कहा उसे पत्थर की लकीर समझो।

१६९. पगड़ी उछालना (अपमानित करना)-अपनी बुरी आदतों के लिए अपने पिता की पगडी उछालना अच्छी बात नहीं।

१७०.  पलकें बिछाना (प्रेमपूर्वक स्वागत करना)-अपने मेहमानों के स्वागत में पलकें बिछाना हम भारतीयों की संस्कृत में है।

१७१. पहाड़ टूट पड़ना (बड़ा संकट आना)-शेयर के भाव गिरते ही उस पर तो मानो पहाड टट पड़ा हो।

१७२. पांचों उँगलियाँ घी में होना (अधिक लाभ होना)-लॉटरी खलने के बाद तो जगत सिंह की पांचों उँगलिया घी में थी

१७३. पापड़ बेलना (कठिन साधना करना)-इस पद तक पहुँचने के लिए उसे खुब पापड बेलने पड़े हैं।

१७२. पानी में आग लगाना (शांति को अशांति में बदलना)-यदि सास बहु मिल-जुलकर रह रही हो, तो  पडोसीन पाणी  में आग लगाने से बाज नहीं आतीं।

१७३. पाला पड़ना (सामना होना) -दिनेश को अब पता चलेगा बॉक्सिग में अब की बार उसका अपने से अधिक  शक्तिशाली प्रतियोगी से पाला पड़ा है।

१७४. पानी-पानी होना (लज्जित होना)-स्कूल में अपने बेटे की करतुते देख माता-पिता पानी-पानी हो गए।

१७५. पीठ दिखाना (हारकर भागना)- वीर व्यक्ति लडाई के मैदान में कभी पीठ नहीं दिखाते।

१७६ . पेट में दाढ़ी होना (कम उम्र में ही जानकार होना)-आजकल छोटे-छोटे बच्चों की बातें सुनकर ।लगता है पेट में दाढ़ी लेकर पैदा होते हैं।

१७७. पैरों तले जमीन खिसकना ( घाबराहाट भरी हैरानी ) चुनावी दंगल मे आपणी पार्टी की करारी हार देखकर नेता जी के पैरों तले जमीन खिसक गई।

१७८. फूंक – फुंककर पैर रखना (बहुत सोच-विचार कर काम करना)-खराब समय में कुशल व्यक्ति फूक फुककर पैर राखता है |

१७९. फूला न समाना (अत्यंत प्रसन्न होना)-कक्षा में प्रथम आने की खबर सुनकर राकेश फूला न समाया।

१८०. बहती गंगा में हाथ धोना. ( अवसर का लाभ उठाणा) आज का हर नेता बहती गंगा में हाथ धोने की सोचता है ।

१८१.  बट्टा लगाना (कलक लगाना)- एसा कोई काम नहीं करना चाहिए जिससे कि तम्हारे माता-पिता के नाम पर बट्टा लगे।

१८२. .बाएँ हाथ का खेल(अति  सरल कार्य  )-इस विशाल पेड़ पर चढना तो मेरे बाएँ हाथ का खेल है।

१८३.  बाजी मारना (आगे निकल जाना)-इस वर्ष कक्षा में सुरेश रमेश से बाजी मार गया।

१८४.  बाल-बाल बचना (दुर्घटना  होते-होते बच जाना)-रेल दर्घटना में दुर्गा बाल-बाल बच गई।

१८५. . बीड़ा उठाना (दृढ़ प्रतिज्ञा करना)-मैंने इस बार कक्षा में प्रथम आने का बीडा उठाया है।

१८६.  भाड़े का टट्टू (पैसे  लेकर काम करने वाला)- रमेश तो आजकल भाडे का टट बन गया है। भीगी बिल्ली हाना (डर से दुबकना)-अध्यापक को देखते ही वह भीगी बिल्ली बन गया।

१८७. भूत सवार होना (किसी काम के लिए हठ करना)-आजकल उसे पढ़ाई का भूत सवार है।

१८८.  भैंस के आगे बीन बजाना (मूर्ख को उपदेश देना)-किसी अशिक्षित के सामने गीता का पाठ करना भैंस के आगे बीन बजाने के समान है।

१८९. भौंह चढ़ाना (नाराज होना)-भौंह चढ़ाने से क्या फायदा, जो कुछ भी है. वह कहकर अपनी बात खत्म करो।

१९०. मक्खी मारना (कुछ न करना)-मक्खी मारने के अलावा तुम्हें कोई काम नहीं।

१९१. मुँह फुलाना (रूठ जाना)-वह बिना कारण ही मुँह फुला लेता है।

१९२. मुंहतोड़ जवाब देना (पूरा-पूरा जवाब देना)-उसके प्रश्न का मैंने ऐसा मुंहतोड़ जवाब दिया कि वह एकदम चुप ही हो गया।

१९३. मुट्ठी गरम करना (रिश्वत देना)-आजकल भ्रष्टाचार इतना ज्यादा फैल गया है कि बिना मुट्ठी गरम किए कोई काम ही नहीं होता।

१९४. रंग में भंग डालना (बना बनाया खेल बिगाड देना)-लड़ाई करके उसने अच्छी भली पार्टी के रंग में भंग डाल दिया।

१९५. रंग जमाना (धाक जमाना)-अपनी मधुर वाणी से उसने महफिल में अपना रंग जमा लिया।

१९६. सिर उठाना (विरोध करना)-पाकिस्तान आजकल हिंदुस्तान के सामने बहुत सिर उठा रहा है।

१९७. सिर नीचा होना (अपमानित होना)-कपत्र के कारनामों से माता-पिता का सिर नीचा हो गया।

१९८. सूर्य को दीपक दिखाना( प्रसिद्ध व्यक्ति का परिचय देना)-राजीव गांधी के बारे में कुछ कहना सूर्य को दीपक दिखाने के बराबर है।

१९९. हक्का -बक्का रह जाना (आश्चर्यचकित हो जाना)-उसके घर की चकाचौंध देखकर मैं तो हक्का-बक्का रहा

२००. हाथ धोकर पीछे पड़ना (बुरी तरह पीछा करना)-मुझे अपना काम उससे करवाना ह, इसीलिए में उसके हाथ धोकर पड़ा हूँ।

२०१. हाथ फैलाना (याचना करना)-हाथ फैलाकर यदि जीवन में कुछ पाया तो वह व्यर्थ ही है।

२०२. हाथों-हाथ बिकना (बहुत जल्दी बिकना)-सरस्वती हाउस की किताबें हाथों-हाथ बिक जाती हैं।

No comments

Hindi vyakaran Mock Test

Scholarship Exam 2024 PAPER 1/2 : Hindi अनेकार्थी शब्द Start The Quiz Time's Up score: Next question See Your Result Total Quest...

Powered by Blogger.